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साईकिल अखिलेश यादव की, चुनाव आयोग ने अपने फैसले में ये कहा

नई दिल्ली : चुनाव आयोग ने अखिलेश यादव को समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष मानते हुए अखिएलश गट को साईकिल सिंबल दे दिया है। आयोग ने जो फैसला सुनाया है, उसके पैरा 36 में विस्तार से लिखा है कि अखिलेश यादव के खेमे ने 228 में से 205 विधायकों, 68 में से 56 एमएलसी और 24 में से 15 सांसदों के समर्थन की चिट्ठी दी. इसके अलावा अखिलेश की ओर से 46 में से 28 नेशनल एक्ज़ीक्यूटिव सदस्यों और 5731 में से 4400 राष्ट्रीय प्रतिनिधियों के हलफनामे सौंपे गए, जिसमें कहा गया था कि वह अखिलेश के खेमे के साथ हैं.
AKHILESH CYCLEE
निर्वाचन आयोग ने सिम्बल ऑर्डर के पैरा 15 का ज़िक्र करते हुये कहा है कि जिसके पक्ष में विधायी और सांगठनिक ताकत है, उसे ही असली दावेदार माना जाता है. अखिलेश की ओर से दिए गए इन शपथपत्रों से उनका दावा मजबूत हुआ. लेकिन इसके उलट मुलायम सिंह यादव खेमे की ओर से सिर्फ यही कहा जाता रहा कि पार्टी पर अब भी नेताजी (मुलायम) की पकड़ है.

चुनाव आयोग ने अपने ऑर्डर के पैरा 37, 38 और 39 में साफ लिखा है कि मुलायम सिंह यादव की ओर से अपने समर्थन में कोई दस्तावेज़ नहीं दिये गये, जबकि आयोग ने उन्हें 9 जनवरी तक का वक्त दिया था. ऐसे में मुलायम का पक्ष कमजोर हुआ और अखिलेश के वकीलों ने 13 जनवरी को चुनाव आयोग में बहस के दौरान इसको मुद्दा बनाया.

आयोग ने यह भी कहा है कि मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश यादव की ओर से जमा किये गये शपथपत्रों की सत्यता पर तो सवाल उठाये लेकिन आयोग को अपनी आपत्ति को लेकर कभी संतुष्ट नहीं किया. आयोग ने अपने आदेश के पैरा 39 में लिखा है कि बार-बार अवसर दिये जाने के बावजूद न तो मुलायम सिंह यादव ने कोई हलफनामा दिया और न ही किसी सांसद या विधायक का नाम बताया, जिसके शपथपत्र को वह फर्ज़ी मानते हों. आयोग के मुताबिक मुलायम यही कहते रहे कि पार्टी में कोई विघटन नहीं हुआ है और वही पार्टी के सर्वेसर्वा हैं. जाहिर है सिर्फ ये दलील काफी नहीं थी और चुनाव चिह्न अखिलेश को दे दिया गया.

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