स्थानीय निकाय चुनावों की मांग फिर उठी ,पंकज सिंह से मिले युवा

नोएडा : सूबे में इंडस्ट्रियल टाउनशिप एक्ट के द्वारा समाप्त किये गए ग्राम पंचायत प्रणाली फिर शुरू करने की मांग फिर उठी है , इस बार शहर की सामाजिक संस्था ‘यूथ लीडर्स ऑफ़ नॉएडा ‘ ने एम एल ए श्री पंकज सिंह से उनके निवास स्थान अकबर रोड पर मिलकर यह मांग उठाई है ,
PANKAJ SINGH
संस्था के संस्थापक सदस्य रंजन तोमर ने बताया के उन्होंने पंकज सिंह को एक ज्ञापन सौंपा है जिसमें इस मांग का उल्लेख किया गया है ,श्री तोमर ने बताया के नॉएडा शहर में अफसरों की राजशाही चलती रहे इसीलिए उन्होंने और पिछली सरकारों ने यह षड़यंत्र रचा , भारत के संविधान में स्थानीय निकाय चुनाव का प्रावधान साफ़ साफ़ अंकित है , ऐसे में औद्योगिक बस्ती का उदाहरण देकर पंचायत प्रणाली समाप्त कर देना वैसा ही है जैसा आपातकालीन स्थिति का कानून लगाकर ज़मीन अधिग्रहित कर लेना और फिर उन्हें बिल्डरों को बेच देना , यह जगजाहिर है के नॉएडा शहर में उद्योग के मुकाबले आवासीय क्षेत्र का विस्तार कितना अधिक है , ऐसे में अपना स्थानीय प्रतिनिधि चुनकर अपने कार्यों को सुगम तरीके से कर पाने की क्षमता को छीन लेना लोकतंत्र की हत्या के समान है !

इस दौरान संस्था के श्री अजय चौहान एवं आयुष चौहान ने मांग उठाई की पंकज जी विधान सभा में ज़ोर शोर से यह मुद्दा उठाये एवं कानून में संशोधन कर ग्राम पंचायत प्रणाली चालू करवाई जाए या फिर नगर पालिका परिषद् का गठन किया जाए जिससे गाँव और शहर की जनता मिलकर अपने प्रतिनिधि चुन सके जो नॉएडा प्राधिकरण जैसी मज़बूत और मनमानी ढंग से कार्य करने वाली संस्था को नियंत्रित कर सके ,साथ ही छोटे छोटे कार्यों को करवाने के लिए आम जनता को रोज़ प्राधिकरण के चक्कर न लागाने पडें !

श्री आदित्य श्रीवास्तव ने विधायक को बताया के कैसे हर छोटे कार्य के लिए प्राधिकरण के कर्मचारी आम जनता से सुविधा शुल्क वसूलते हैं , और इसी मलाई के चक्कर में कभी नहीं चाहते के पंचायत या नगर पालिका प्रणाली यहाँ लागू हो !

वहीँ पुनीत राणा ने विधायक जी को याद दिलाया के 2015 में ही नहीं अपितु सन 2000 में भी पंचायत चुनाव समाप्त कर दिए गए थे पर तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री राजनाथ सिंह जी ने ग्राम प्रधानों से मिलकर फिर चुनाव प्रणाली लागू कर दी थी !

अंकित अग्गरवाल एवं प्रवीण चौहान ने किसानों के मुद्दे विधायक के सामने रखे जिनमें आबादी निस्तारण मुख्या बिंदुओं में रहा जिसके कारण हज़ारों मामले कोर्ट में लंबित हैं जबकि प्राधिकरण की नयी नियमावली के तहत करार के तहत काफी हद तक मामले सुलझाए जा सकते हैं , इसी के साथ ही किसानों को दिए जाने वाले पांच प्रतिशत प्लाट को फ्रीहोल्ड करने की बात भी उन्होंने विधायक के सामने रखी जिससे यदि किसान स्वयं के इस्तेमाल के लिए प्लाट रखता है तो वह उसपर व्यापारिक गतिविधियां आदि चला सके बिना किसी शुल्क के ! यह ही नहीं दस प्रतिशत प्लाट दिए जाने की प्रक्रिया जो पुराने वर्षों में अधिग्रहित ज़मीनो से होनी चाहिए थी वह हाल के अधिग्रहित क्षेत्रों से की जा रही है जिससे दाल में काला होने और प्रथमद्रष्टया पैसे लेकर पहले प्लाट आवंटित कर देने का मामला दिखाई पड़ता है !

सभी मुद्दों पर विधायक ने हामी भरी और विधान सभा में उठाने का वायदा किया साथ ही संस्था को साथ मिलकर कार्य करने के लिए आमंत्रित किया।