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आर्थिक मदद पाने की लालच में दर्ज कराई थी फर्जी गैंग रेप की रिपोर्ट

ग्रेटर नोएडा : पैसों के लिए कोई किसी भी हद तक गिर सकता है। इसका नमूना सूरजपुर कोतवाली में दर्ज सामूहिक दुष्कर्म के एक मामले की जांच में सामने आई है। न्यायालय में दिए गए बयान में महिला गैंगरेप की बात से मुकर गई। पुलिस ने मामला स्पंज कर दिया। जांच में पुलिस को पता चला कि महिला के पति ने शासन से मिलने वाली सात लाख रुपये की आर्थिक मदद की लालच में फर्जी मुकदमा दर्ज कराया था।

सूरजपुर कोतवाली में 8 दिसंबर को दादरी निवासी एक महिला ने गैंगरेप की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। महिला ने बताया था कि वह छह दिसंबर को अपने पांच साल के बच्चे के साथ दादरी से ग्रेटर नोएडा स्थित एक अस्पताल में आ रही थी। उसके एक हाथ में फ्रैक्चर था। अस्पताल में दवा लेनी थी और प्लास्टर भी कटवाना था। महिला का पति भी अस्पताल में काम करता था। महिला ने बताया था कि दादरी फाटक से जिस आटो में बैठी थी, उसमें चालक के साथ एक अन्य व्यक्ति भी बैठा था।

चालक आटो को सूरजपुर औद्योगिक क्षेत्र में ले गया था। दोनों ने बच्चे की हत्या की धमकी देकर आटो में ही गैंगरेप किया था। महिला की शिकायत पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। कोतवाली प्रभारी अनुज कुमार ने बताया कि महिला ने जांच में सहयोग करने से इन्कार कर दिया। पुलिस को आशंका थी कि मामला फर्जी है, क्योंकि महिला आरोपियों का हुलिया और आटो का नंबर आदि नहीं बता पा रही थी। पुलिस ने मौके पर जाकर लोगों से भी पूछताछ की थी। जहां पर वारदात होने की बात महिला ने बताई थी, उस रास्ते से सुबह काफी संख्या में लोग कंपनियों में नौकरी करने के लिए आते हैं, लेकिन किसी ने इस प्रकार की बात से इन्कार किया। उन्होंने बताया कि महिला की मेडिकल रिपोर्ट में भी इंटरनल इंजरी की पुष्टि नहीं हुई है। कोर्ट में भी महिला अपने साथ गैंगरेप की बात से मुकर गई। जांच में पता चला कि महिला के पति ने उससे जबरदस्ती यह रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। शासन से गैंगरेप पीड़िता को 7 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है। महिला का पति यह आर्थिक मदद पाना चाहता था। झूठी रिपोर्ट लिखाने पर उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया जाएगा। GRENONEWS.COM