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गलगोटिया यूनिवर्सिटी में संगीत संगोष्ठी : शिक्षण के साथ संगीत का होना जरुरी – ध्रुव गलगोटिया

ग्रेटर नोएडा : गलगोटिया विश्वविद्यालय में भारतीय संस्कृति व संगीत को बढावा देने के लिए एक संगीत संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि बनारस घराना से संगीत शास्त्री पं0 राजेंद्र प्रसन्ना और जयपुर घराना से मोनिशा नायक सामिल हुए।
GALGOTIA UNIVERSITY
कार्यक्रम में बांसुरी व शहनाई वादक पं0 राजेंद्र प्रसन्ना ने राग, भैरवी, वैश्नव संगीत और अन्य संगीतो की प्रसतुती दी। बांसुरी के बाद श्री अर्थव हुसैन ने तबले के सुरो से समा बाँधा जिसमें उनका साथ सहजाद रशीद ने तान पुरे से दिया। छात्रों की मांग पर पंडित जी ने अनेक भारतीय संगीत पर बांसुरी बजाकर सभी को मंत्रमंुग्ध कर दिया। जयपुर घराने से आई नेशनल अवार्डी मोनिका नायक ने कृष्ण भक्ति व कथक नृत्य से छात्रों को रूबरू कराया। जिससे छात्रों के साथ, साथ शिक्षकगण भी भाव विभोर हो गए। पं0 राजेंद्र प्रसन्ना कहा कि भारतीय संगीत में तेजी से बदलाव हुआ है। लेकिन हमे तथा नई पीढी को यह सीखना और समझना चाहिए कि यह केवल मनोरंजन का साधन नही है। बल्कि यह हमारी भारतीय संस्कृति की आत्मा है। कहा कि सभी संगीतों और वाद यंत्रों में काफी बदलाव किया है। परन्तु बांसुरी ऐसा वाद यंत्र है। जो कृष्ण काल से लेकर अब तक शुद्ध है। विश्वविद्यालय के सी,ई,ओ ध्रुव गलगोटिया ने संगोष्ठी में आए सभी कलाकारों की सराहना करते हुए कहा कि हमे व छात्रों को इस कार्यक्रम से बहुत अधिक सीखनेे को मिला। कहा कि शिक्षा के साथ, साथ जीवन में संगीत का होना भी बहुत जरूरी है। संगीत मानसिक दबाव को कम करता हैं। कार्यक्रम में डीन आॅफ स्टूडैंट अफेयर विन्नी खन्ना माथुर, देवांजना शर्मा आदि उपस्थित रहे।