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IIMT : भारत में 60 लाख चिकित्सकों की कमी: अरुण कुमार झा

ग्रेटर नोएडा : स्वास्थ्य मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार अरुण कुमार झा ने कहा है कि भारत में अभी भी 60 लाख चिकित्सकों की कमी है. फार्मेसी, पारा-चिकित्सा आदि के क्षेत्र में भी अभी भारी कमी महसूस की जा रही है. लेकिन इस कमी को अवसर के रुप में भी देखने की जरुरुत है क्योंकि इस कमी ने रोजगार के लिए इस क्षेत्र में असीम संभावना पैदा की है. श्री अरुण कुमार झा ने ये बातें नॉलेज पार्क-3 स्थित आईआईएमटी कॉलेज ऑफ फार्मेसी में आयोजित एक नेशनल सेमिनार में कही. इनोवेशन एंड स्टार्ट-अप इन फार्मास्यूटिकल एंड हेल्थकेयर पर आयोजित इस सेमिनार में देश भर से आए पांच सौ से ज्यादा लोगों ने शिरकत की.
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इस विषय पर विस्तार से चर्चा करते हुए फार्मेसी कॉउंसिल ऑफ़ इंडिया की रजिस्ट्रार एवं सह सचिव सुश्री अर्चना मुद्गल ने कहा कि हमारे सामने दो प्रश्न हैं. पहला कि फार्मेसी की शिक्षा का स्तर क्या है और इस क्षेत्र में नौकरियां कितनी हैं. उन्होंने कहाँ कि शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए फार्मेसी कॉउंसिल ऑफ़ इंडिया , प्रबंधन,शिक्षकों, अभिभावकों व छात्रों को जिम्मेदारी से काम करना होगा. उन्होंने कहा कि अगर हम बाजार और ग्राहक के व्यवहार का सर्वेक्षण नहीं करेंगे तो फेल हो जाएंगे. उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जैसे कोडेक रोल, ब्लैक बेरी,याहू और एअर इंडिया अपने अपने क्षेत्र के ब्रांड लीडर थे लेकिन ग्राहकों की मांग को नहीं समझने के कारण अब वो पिछड़ते जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि अनियमित जीवनशैली ने कई नये रोग भी दिए हैं. ऐसे में इन रोगों से निपटने के लिए रिसर्च एवं नयी दवाओं की खोज की आवश्यकता है.
आईआईएमटी कॉलेज के प्रबंध निदेशक श्री मयंक अग्रवाल ने इस मौके पर कहा कि रोज नये नये अविष्कार हो रहे हैं. सरकार भी इस क्षेत्र में काफी सहयोग कर रही है. अगर आपके पास नयी सोच है तो आपकी राह में कोई भी बाधा नहीं आएगी. एम एस एम ई के निदेशक श्री आर के पाणिग्रही ने कहा कि छात्रों का हौंसला बढ़ाते हुए कहा कि भारत में इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं. इस सेमिनार में विभिन्न विद्वानों ने अपने विचार रखे. सेमिनार के मुख्य वक्ताओं में विशाल बंसल,अमरदीप वाजपेयी, सौरव सुमन, आर एस तोमर आदि प्रमुख थे. आईआईएमटी कॉलेज आफ फार्मेसी के डायरेक्टर डॉ मल्लिकार्जुन बीपी ने अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया.