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UP ELECTION 2017 : जनता को पसंद नहीं आया राहुल-अखिलेश का साथ , ये रही वजह

नई दिल्ली : नतीजे बता रहे हैं कि यूपी की जनता ने ‘अपने लड़कों’ पर ‘गोद लिए बेटे’ को चुना. लेकिन आखिर वो क्या वजहें थीं जिनके चलते लोगों को राहुल और अखिलेश का साथ पसंद नहीं आया?
rahul akhilesh
कुनबे की कलह

चुनावों से ऐन पहले मुलायम के कुनबे में जो फैमिली ड्रामा देखने को मिला, उसे जनता के जेहन से कोई चमत्कार ही मिटा सकता था. इस पारिवारिक फूट ने ना सिर्फ समाजवादी पार्टी में कलह को जगजाहिर किया बल्कि यूपी की फर्स्ट फैमिली की इमेज को भी ऐसा नुकसान पहुंचाया जिसकी भरपाई मुमकिन नहीं थी. इसके चलते पार्टी के उम्मीदवारों को लेकर मतभेद रहे और मुलायम के अलावा शिवपाल यादव ने भी प्रचार से दूरी बनाए रखी. जाहिर है जनता ने ऐसे परिवार को सत्ता सौंपने से गुरेज किया जिसके सदस्य एक दूसरे की आंख में आंख मिलाकर देखने को ही राजी ना हों.

कानून-व्यवस्था

अखिलेश यादव की सरकार को खराब कानून व्यवस्था का आरोप चुनावों से बहुत पहले से झेलना पड़ रहा था. पिछले 5 सालों के दौरान मुजफ्फरनगर जैसे अनेकों दंगों ने मुस्लिमों के बीच समाजवादी पार्टी की विश्वसनीयता को कम किया. प्रचार के दौरान अमित शाह और नरेंद्र मोदी के अलावा मायावती ने भी इस मुद्दे को जमकर उछाला. राज्य में महिलाओं की असुरक्षा के मुद्दे पर भी अखिलेश सरकार माकूल जवाब देने में नाकाम रही.

यादवपरस्त नीतियां

जब मोदी ने प्रचार के दौरान ये आरोप लगाया कि यूपी के थानों से समाजवादी पार्टी का दफ्तर चलता है तो वो दरअसल अखिलेश राज में नौकरियों की भर्तियों में यादवों को मिली तरजीह की ओर इशारा कर रहे थे. पांच साल की भर्तियों के आंकड़े भी इस बात की तस्दीक करते हैं. बीजेपी ने समाजवादी पार्टी पर सरकारी योजनाओं में भी कुछ जातियों को फायदा देने का आरोप लगाया. इससे ना सिर्फ अगड़ी जातियों बल्कि गैर-यादव पिछड़ी जातियों में भी समाजवादी पार्टी के खिलाफ हवा बनी.