• Home »
  • UP ELECTION 2017 »
  • UP ELECTION 2017 : मतदान में युवाओं की बढ़ती भागीदारी से फतवों का ज़माना लदा

UP ELECTION 2017 : मतदान में युवाओं की बढ़ती भागीदारी से फतवों का ज़माना लदा

ग्रेटर नोएडा : जनपद के नोएडा व ग्रेटर नोएडा में अब चुनावी क्षत्रप लगभग समाप्त हो चुके हैं। एक ज़माना था, जब बिरादरी के मुखिया के फरमान पर इलाके के मतदाता एकजुट होकर मतदान करते थे। इन दिग्गजों की एक जुबान पर किसी भी प्रत्याशी की जीत पक्की हो जाती थी। लेकिन, अब उन फतवों का जमाना लद चुका है। एक तो पुराने दिग्गज नहीं रहे, दूसरा, युवा मतदाताओं की संख्या में इजाफा से अब जाति बिरादरी का कोई फैक्टर कामयाब ही नहीं होता है।
YOUTH
दादरी से 30 किलोमीटर के दायरे में गौतमबुद्ध नगर की तीन, गाजियाबाद की दो और बुलन्दशहर की एक विधानसभा सीट आती है। इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति पर नज़र डालें तो, एक ओर नोएडा का खादर क्षेत्र है जो आज एक सुनियोजित शहर का रूप ले चुका है। दूसरी ओर एनटीपीसी के आसपास ठाकुर बाहुल्य इलाका है, जिसे साठा चौरासी कहते हैं। इस पूरे क्षेत्र में लगभग सभी जाति-बिरादरियों के लोग रहते हैं। कुछ दशक पहले तक यहां के मतदाताओं का रुख वे खुद नहीं, बल्कि बिरादरी के सरदार तय किया करते थे। नोएडा-ग्रेटर नोएडा जैसे अत्याधुनिक शहर में आज यह बात भले ही अटपटी लगे लेकिन, यह सच्चाई थी। दादरी-सिकंदराबाद इलाके के भाटी गुर्जर बाहुल्य गांवों में पूर्व मंत्री तेज सिंह भाटी का फतवा चलता था। दोनों विधानसभा सीटों के मध्य के गांवों में पूर्व सांसद और दिग्गज कांग्रेसी नेता रामचन्द्र विकल का दबदबा रहता था। दुर्भाग्य से अब दोनों इस दुनिया में नहीं हैं। ग्रेटर नोएडा के खादर क्षेत्र में चौधरी हरि सिंह का दबदबा रहता था। घरबरा गांव के रहने वाले हरि सिंह को गंगा-यमुना के बीच के इलाके का सबसे बड़ा जमींदार माना जाता था। उनका भी निधन हो चुका है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री राजेश पायलट बिधूड़ी गोत्र के थे। लेकिन, उनका फरमान नागर बाहुल्य गांव वेदपुरा, सादल्लापुर, दुजाना आदि में चलता था। हालांकि पूरी कोशिशों के बावजूद वे दादरी-नोएडा से कांग्रेस के किसी भी उम्मीदवार को चुनाव नहीं जिता पाए थे। एनटीपीसी क्षेत्र के साठा-चौरासी के गांवों में यही स्थिति ठाकुर मेघनाथ सिंह की थी। उनके एक इशारे पर इन गांवों के लोग किसी भी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान कर देते थे। दादरी क्षेत्र के ब्र्राह्मण मतदाताओं में यह जलवा पंडित शोभाराम शर्मा का था। विभिन्न समाजों के ये कद्दावर लोग अब इस दुनिया में नहीं हैं। बदले हालातों के लिए युवा मतदाताओं की तेजी से बढ़ी संख्या को माना जा रहा है। जिले में अब युवा मतदाताओं की संख्या करीब 40 फीसदी हो गई है। जो शिक्षित हैं और राजनीति की नब्ज जानते हैं। गौतमबुद्धनगर में 18-20 साल के ऐसे युवा मतदाताओं की संख्या 18,276 है। 20-29 वर्ष के मतदाताओं की संख्या 3, 26, 871 है। और 30-39 आयु वर्ष के मतदाताओं की संख्या 3,48,377 हो गई है। मोरना गांव के बुजुर्ग बाबा भूले सिंह बताते हैं कि दो दशक पूर्व तक बिरादरियों के छत्रपों का समर्थन हासिल करने के लिए उम्मीदवारों की लाइन लगती थीं। आम मतदाता भी इनके रुख का इंतजार करता था। बूढ़े जिधर खड़े होते थे, वही पलड़ा भारी माना जाता था। लेकिन अब नोएडा व दादरी विधानसभा क्षेत्र में बहारी लोग ज्यादा आ बसे हैं। इनमें भी युवाओं की संख्या ज्यादा है जो जाति बिरादरी की जगह विकास जैसे मुददों को तवज्जो देती है। — रोहित प्रियदर्शन GRENONEWS.COM

Sharing is caring!